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Aachrya Pramod Krishnam


विश्व को एक नयी दिशा और वसुदेव कुटुंबकम का दर्शन देने के लिए अनेको ऋषि- मुनि, महात्मा और संत भारत की भूमि पर आये है जिन्होंने अपने चिंतन और साधना की शक्ति से हर युग में एक नयी ऊर्जा मानवता को प्रदान की है। इसी श्रंखला में श्री कल्कि पीठाधीश्वर प्रमोद कृष्णम जी का नाम बड़े सम्मान व गौरव के साथ लिया जाता है। श्री प्रमोद कृष्णमजी का जन्म २ जुलाई १९६२ को उत्तर प्रदेश के संभल जनपद के एक गांव एंचोड़ा कम्बोह में त्यागी-ब्राह्मण परिवार में हुआ।
पुराणों का उद्घोष है कि भगवान श्री हरिविष्णु का दसवां व अंतिम अवतार श्री कल्कि के रूप में इसी संभल नमक स्थान पर होगा। पुराणों की इस उद्घोषणा को जन जन तक पहुंचने का महानतम कार्य करने का श्रेय आचार्य श्री प्रमोद कृष्णम जी को ही दिया जाता है। यूँ तो विश्व में अनेको पीठ और धाम स्थापित है, परन्तु श्री कल्कि पीठ एक ऐसा सिद्ध स्थान है जिसकी स्थापना भगवान के अवतरण से पूर्व हुई है।
२ नवंबर २००७ को भारत के प्रमुख संतो की उपस्थिति में श्री कल्कि पीठाधीश्वर आचार्य प्रमोद कृष्णम जी ने श्री कल्कि धाम के निर्माण का संकल्प लेते हुए यह घोषणा की, कि श्री कल्कि धाम विश्व का एक अनूठा धाम होगा जिसमे भगवान श्री हरी विष्णु के दसावतार के १० अलग अलग गर्भ गृह होंगे।

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जन -जन के ह्रदय तक श्री कल्कि भगवान की भक्ति पहुँचाने के लिए श्री आचार्य प्रमोद कृष्णम निरंतर रूप से कार्यरत है। विश्वबंधुत्व और वसुधेव कुटुंबकम के भाव को आत्मसात करते हुए श्री आचार्य प्रमोद कृष्णम जी ने हिन्दू मुस्लिम एकता के लिए अत्यंत सराहनीय कार्य किया है। ऋषि परंपरा में श्री आचार्य प्रमोद एक ऐसे विलक्षण संत है जिनके लाखों अनुयायी ईसाई और इस्लाम धर्म के मानने वाले है हालांकि उन्हें अपने कार्यो को लेकर कई बार विरोध भी झेलना पड़ा है। परन्तु श्री आचार्य प्रमोद जी का एक मत है कि परमात्मा एक है और हम सब परमात्मा की संतान है तो फिर हम अलग कैसे हो सकते है कट्टरता और संकीर्णता का नाम धर्म नहीं हो सकता इसलिए विश्व के प्रत्येक भाग में रहने वाला प्रत्येक मानव हमारा है। श्री कल्कि पीठाधीश्वर आचार्य प्रमोद कृष्णम जी का प्रयास है कि भगवान श्री कल्कि के नाम से एक आध्यात्मिक विश्वविद्यालय, वैदिक गुरुकुल गौशाला और एक अस्पताल का निर्माण भी श्री कल्किधाम के साथ ही पूर्ण हो।
श्री कल्कि धाम का वार्षिक उत्सव श्री कल्कि महोत्सव के रूप में प्रतिवर्ष बड़े धूम धाम से दीपावली के बाद मनाया जाता है जिसमे १०८ कुंडीय महायज्ञ, संत समागम और सांस्कृतिक संध्याएं, साहित्य और कला के जगत में अपना एक विशेष स्थान रखते है। गंगा की निर्मलता व अविरलता के साथ साथ गोरक्षा और राष्ट्र रक्षा श्री आचार्य प्रमोद कृष्णम जी के प्रमुख संकल्पो में एक महत्व पूर्ण स्थान रखते है। श्री आचार्य प्रमोद जी सर्वधर्म सम्भाव के प्रति समर्पित है।
श्री कल्कि फाउंडेशन और परमार्थ ट्रस्ट द्वारा समाज के कमजोर वर्गों के लिए शिक्षा और स्वस्थ्य के साथ साथ मासिक निर्वाण पत्रिका का प्रकाशन किया जा रहा है। धर्म एवं राष्ट्र से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर देश के विचारको और दूसरे धर्म के धर्म गुरुओं के साथ चिंतन करके ज्वलंत समस्याओ के समाधान हेतु श्री आचार्य प्रमोद जी निरंतर प्रयासरत रहते है।
आर्ट ऑफ़ लिविंग के संस्थापक श्री श्री रविशंकर हो या जमीयत के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी साहब हो या फिर डॉ डोमिनिक और बौद्ध धर्म गुरु दलाई लामा हो, समय समय पर इन महापुरूषो से विचार विमर्श करने का काम आचार्य श्री के द्वारा ही किया जा रहा है ताकि देश में सर्व धर्म समभाव रहे।

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